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  :: विज्ञान-उद्यान (SCIENCE-PARK)
   

आज से लगभग 108 वर्ष पूर्व स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि यदि हमें जीवित रहना है तो हमें एक वैज्ञानिक राष्ट्र बनाना होगा। यह बात स्वामीजी ने उस समय कही थी जब आधुनिक विज्ञान प्रारंभिक अवस्था में था और उस समय उन्होंने राष्ट्रीय विकास के लिये विज्ञान की महती आवश्यकता और महत्व का अनुभव कर लिया था। न केवल राष्ट्रीय विकास के लिये वरन् समूची मानव सभ्यता के विकास के लिये विज्ञान का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसलिये विद्यार्थियों में प्रारंभ से ही विज्ञान के प्रति अभिरूचि जागृत कर उन्हें विज्ञान की शिक्षा देना आवश्यक है। यह विज्ञान की शिक्षा अधिक प्रभावी और उपयोगी तब हो जाती है जब वातावरण और दैनिक क्रिया-कलापों में निहित वैज्ञानिक तथ्यों का ज्ञान छात्र-छात्राओं को खेल-खेल में रोचक तरीके से कराया जाए। उपरोक्त बातों को ध्यान में रखकर मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद् ने खेल-खेल में विज्ञान सीखने और सिखाने के लिये तथा दैनिक जीवन में उपयोगी वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी देने के लिए विज्ञान-उद्यान के स्थापना की योजना बनायी है।
 

उद्देश्य -
मूलत: विज्ञान-उद्यान की स्थापना के पीछे निम्नलिखित उद्देश्य हैं :
  • जनसामान्य में विशेषत: विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति अभिरूचि विकसित करना।

  • दैनिक जीवन के कार्यों में निहित विज्ञान के मौलिक सिध्दांतों की जानकारी देना।

  • विज्ञान के जटिल सिध्दांतों को खेल-खेल में समझाना।

  • वैज्ञानिक जिज्ञासा का समाधान देना।

  • स्वयं करके सीखने का वातावरण प्रदान करना।

  • पर्यावरण को भली-भांति समझने और समझाने में सहायता करना।

  • औषधि-पौधों, को पहचानने एवं मानव जीवन के लिए उसकी उपयोगिता समझने में सहायता करना।

  • विज्ञान आधारित गतिविधियों एवं कार्यक्रमों के आयोजन हेतु उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराना।

छत्तीसगढ़ में विज्ञान-उद्यान की स्थापना

विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रूचि विकसित करने के लिये मध्यप्रदेश विज्ञान और प्राद्योगिकी परिषद् ने बी.म. बिरला साइन्स सेन्टर, हैदराबाद के सहायोग से रामकृष्ण मिशन आश्रम, नारायणपुर (बस्तर) एवं विवेकानन्द विद्यापीठ, रायपुर में विज्ञान-उद्यान की स्थापना की है।
ये विज्ञान-उद्यान मुक्ताकाश एवं सुरम्य नैसर्गिक वातावरण में स्थापित किये गये हैं जहां विज्ञान के जटिल सिध्दांतों को भी विद्यार्थी वहां रखे गये माडल्स के साथ खेलकर आसानी से समझ सकते हैं। ये माडल्स विज्ञान के मूल सिध्दांतों से संबंधित है जो छात्रों और सामान्य दर्शकों के लिये समान रूप से रूचिकर है। इनके द्वारा बच्चों में खेल और जिज्ञासा की वृत्ति विकसित होती है और इस प्रकार वे मुक्त वातावरण में खेल-खेल में विज्ञान के ज्ञान का प्रचार-प्रसार कर आनन्द की अनुभूति कर सकते है।
मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् ने छत्तीसगढ़ में उपरोक्त जिन दो संस्थाओं में विज्ञान-उद्यान की स्थापना की है उसका संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित हैं -

 

विज्ञान-उद्यान में रखे गये प्रादर्श (माडल्स)

1. ऊर्जा पहेली (ENERGY MAZE)
या विधि : गेंद को पटरी के ऊपरी सिरे पर रखिये और देखिये क्या होता है।
सिध्दांत : जब गेंद उठाकर उपरी सिरे पर ले जाया जाता है, यह स्थितिज उर्जा अर्जित करता है और पटरी पर नीचे लुढ़क जाता है। यह स्थिति ऊर्जा से गतिज उर्जा में बदल जाता है। यह ऊर्जा भार उठाने या ध्वनि पैदा करने जैसे कार्य कर सकती है।

2. झुके हुए तल (INCLINED PLAN)
क्रिया विधि : वजनों को ऊपर खींचने की चेष्टा कीजिए।
सिध्दांत : किसी भारी वस्तु को एक निश्चित ऊंचाई तक ले जाने के लिये उसे सीधे खींचने की अपेक्षा नतसमतलों का प्रयोग करके ऊपर खींचना अधिक सरल होता है। पृथ्वी से नतसमतल का झुकाव

जितना कम होगा तल में से होकर वस्तु को ऊपर सरकाना उतना ही सरल होगा।

3. घिरनियां और पेटियां (PULLEYS AND BELTS)
क्रिया विधि : हत्थे को घुमाइये और विभिन्न पहियों (घिरनियों) की गतियों का अवलोकन कीजिए।
सिध्दांत : विभिन्न पहिये (घिरनियां) एक दूसरे से बेल्टस् के द्वारा जुड़े हुए है।

बड़े पहिए के एक चक्कर (घुमाव) से छोटे पहियों में कई चक्कर पैदा होते है। इससे गति कई गुनी हो जाती है।

4. अपने आपको उठाईये (LIFT YOURSELF)
क्रिया विधि : कुर्सी पर बैठिये और रस्सी को खींचकर खुद को ऊपर उठाइये।
सिध्दांत : यह कार्य कुछ अचल एवं चल घिरनियों से ही संभव हो सका है। रस्सी का वह हिस्सा जिसका छोर स्थिर है आपका आधा भार वहन करता है। अत: अपने आपको उठाने में लगाया गया बल आधा हो जाता है। यहां पर रस्सी चूंकि तीन चल एवं अचल घिरनियों पर से होकर आती है, अत: आपके द्वारा लगाया गया बल भी घट कर छठवां हिस्सा ही रह जाता है।

5. उत्तोलक (LEVERS)
या विधि : विभिन्न उत्तोलकों की सहायता से वजन को उठाने का प्रयास कीजिए।
सिध्दांत : वजनों को उठाने के लिये प्रयुक्त किये जाने वाले विभिन्न छड़ों (उत्तोलकों) में से, सबसे लम्बे हत्थे (आयास भुजा) के द्वारा किसी भार को उठाना सबसे सरल होता है।

 

 

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